उतरौला कोतवाली अंतर्गत बढ़या भैसाही गांव निवासी संदिग्ध आतंकी मुस्तकीम उर्फ अबू युसुफ उर्फ बाबा पर गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम कानून (यूएपीए) के तहत कार्रवाई हुई है। प्रकरण की जांच दिल्ली विशेष प्रकोष्ठ पुलिस से लेकर एनआईए को दी जा सकती है। इस बात की जानकारी खुफिया संगठनों से मिली है। संदिग्ध आतंकी डा. असरार व डा. सईद मेराज मदनी रब्बानी की तकरीर सुनकर आत्मघाती बनने की राह पर चला था।
पता चला है कि बढ़या भैसाही निवासी मो. मुस्तकीम खान ने वर्ष 2015 में फेसबुक पर सक्रियता कम कर दी थी। वह पाकिस्तान व अफगानिस्तान में बैठे अपने आकाओं से टेलीग्राम पर चैट करता था। वह डा. इकरार अहमद की तकरीर दिनभर सुनता था। डा. इकरार अहमद को आरएसएस का कट्टर विरोधी माना जाता है। इकरार कट्टर इस्लामिक नेता था जो मुस्लिम युवाओं को भड़काता था। मुस्तकीम ने डा. इकरार से ही कट्टरपंथी बनने की सीख ली। इकरार की दर्जनों तकरीर यूट्यूब पर अपलोड हैं।
मुस्तकीम का दूसरा पंसदीदा तकरीर डा. सईद मेराज रब्बानी मदनी का है। डा. सईद भारत विभाजन के पक्षधर व मुसलमानों की हमदर्दी का नाटक अपनी तकरीर में करता है। मुस्तकीम अक्सर उसकी तकरीर सुनता था। उसने डा. सईद की कट्टरपंथी विचारधारा अपनाई थी। खुफिया सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक मुस्तकीम पर यूएपीए की धारा तामील की गई है जिसमें उसे जमानत मिलनी मुश्किल है। बताते हैं कि मामले की जांच अभी तक दिल्ली विशेष पुलिस के पास है। कुछ ही दिनों में यह जांच नेशनल इन्वेटीगेशन एजेंसी को जानी तय मानी जा रही है, क्योंकि एनआईए की आतंकी प्रकरण की जांच करती है।
मुस्तकीम को था निशानेबाजी का शौक
मुस्तकीम को निशानेबाजी का शौक है। उसके पास एयरगन है। उसने अपने घर के कमरे में टारगेट फिक्स कर रखा था। बताते हैं कि वह नियमित एयरगन से एक घंटे तक निशाना साधता था। उड़ते हुए पक्षियों पर निशाना लगाने में उसे मजा आता था। ग्रामीणों की मानें तो उसका निशाना पक्का था। वह कई उड़ते कबूतरों पर फायर कर मारने में कामयाब रहा है।

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